सरकार ने पेट्रोल-डीजल पर उत्पाद शुल्क दस रुपये घटाया

मुद्रास्फीति (महंगाई) के दबाव को कम करने के उद्देश्य से एक बड़े राजकोषीय हस्तक्षेप में, भारत सरकार ने गुरुवार को पेट्रोल और डीजल पर अतिरिक्त उत्पाद शुल्क में भारी कटौती की घोषणा की। दोनों ईंधनों पर शुल्क में ₹10 प्रति लीटर की कमी की गई है। यह कदम उन उपभोक्ताओं के लिए एक बड़ी राहत है जो पश्चिम एशिया में चल रहे अमेरिका-ईरान संघर्ष के कारण बढ़ी हुई ऊर्जा लागत से जूझ रहे थे।

आधिकारिक गजट अधिसूचना के अनुसार:

  • पेट्रोल: उत्पाद शुल्क ₹13 प्रति लीटर से घटाकर ₹3 प्रति लीटर कर दिया गया है।

  • डीजल: परिवहन और कृषि क्षेत्र की रीढ़ माने जाने वाले डीजल पर शुल्क ₹10 प्रति लीटर से घटाकर शून्य (₹0) कर दिया गया है।

रणनीतिक समय: वैश्विक तनाव में कमी का लाभ

सरकार का यह निर्णय वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में आई नरमी के साथ मेल खाता है। होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव के कारण हफ्तों की अस्थिरता के बाद, वाशिंगटन से मिल रहे कूटनीतिक संकेतों के बाद कीमतों में कमी आने लगी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में संकेत दिया कि तेहरान के साथ बातचीत “बहुत अच्छी” चल रही है।

इस कूटनीतिक सुधार ने ब्रेंट क्रूड पर जोखिम प्रीमियम (risk premium) को कम कर दिया है, जिससे भारतीय वित्त मंत्रालय को जनता को लाभ पहुँचाने के लिए आवश्यक वित्तीय गुंजाइश मिली है। भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का 85% से अधिक आयात करता है, इसलिए वह मध्य पूर्व की भू-राजनीति के प्रति अत्यधिक संवेदनशील रहता है।

विशेषज्ञ राय: “महंगाई पर लगाम लगाने की कोशिश”

प्रसिद्ध अर्थशास्त्री और पूर्व मुख्य आर्थिक सलाहकार डॉ. अरविंद विरमानी ने इस कदम पर टिप्पणी करते हुए कहा: “यह मुद्रास्फीति की उम्मीदों को थामने के लिए उठाया गया एक नपा-तुला कदम है। डीजल पर कर के बोझ को शून्य करके, सरकार सीधे तौर पर लॉजिस्टिक्स और खेती की इनपुट लागत को संबोधित कर रही है। हालांकि इससे राजकोषीय घाटे (fiscal deficit) पर असर पड़ेगा, लेकिन आम आदमी को पश्चिम एशिया के झटके से बचाना वर्तमान में व्यापक आर्थिक स्थिरता के लिए उच्च प्राथमिकता है।”

बाजार पर प्रभाव: ऑयल मार्केटिंग कंपनियां (OMCs) फोकस में

इस घोषणा ने दलाल स्ट्रीट पर हलचल पैदा कर दी है। सरकारी तेल विपणन कंपनियों (OMCs) के शेयरों में मिली-जुली लेकिन काफी हद तक सकारात्मक प्रतिक्रिया देखी गई:

  • HPCL: 2.5% की बढ़त।

  • BPCL: 0.9% की बढ़त।

  • IOC: 1.4% की बढ़त।

हालांकि, विश्लेषकों का सुझाव है कि लंबी अवधि का दृष्टिकोण सतर्क बना हुआ है। यदि पश्चिम एशिया में युद्धविराम अस्थायी साबित होता है और कच्चे तेल की कीमतों में फिर से उछाल आता है, तो इन कंपनियों के मार्जिन पर दबाव पड़ सकता है।

राजकोषीय उपकरण के रूप में ईंधन कर

भारत में, ईंधन पर उत्पाद शुल्क ऐतिहासिक रूप से केंद्र सरकार के लिए राजस्व का एक महत्वपूर्ण स्रोत रहा है। विशेष रूप से महामारी के वर्षों के दौरान, जब वैश्विक तेल की कीमतें रिकॉर्ड निचले स्तर पर थीं, तब इसका उपयोग राजस्व बढ़ाने के लिए किया गया था। हालांकि, वर्तमान युद्ध के कारण महंगाई को भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के संतोषजनक दायरे से बाहर जाने के खतरे को देखते हुए, सरकार ने “राजस्व अधिकतमकरण” के बजाय “मुद्रास्फीति प्रबंधन” को प्राथमिकता दी है।

वैश्विक अनिश्चितता के बीच संतुलन

यद्यपि ₹10 की कटौती तत्काल राहत प्रदान करती है, लेकिन व्यापक बाजार अभी भी पश्चिम एशिया के घटनाक्रमों से जुड़ा हुआ है। पाकिस्तान के माध्यम से चल रही अप्रत्यक्ष बातचीत और अमेरिकी प्रशासन द्वारा उल्लेखित तेल टैंकरों का मामला प्रमुख चर (variables) बने हुए हैं। फिलहाल, भारतीय उपभोक्ता राहत की सांस ले सकते हैं क्योंकि सरकार ने एक दूर देश में चल रहे युद्ध की तपिश से घरेलू अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए अपने राजकोषीय तंत्र का उपयोग किया है।

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